शनिवार, 10 अक्तूबर 2009

नई उतरिस बिच्छी के झार-पटवारी साहेब ला परगे मार

हमर पटवारी भईया हा नवा-नवा उदिम लगावत रहिथे,थोकिन मा फेल घलोक हो जथे,ए बेरा ओ हा सोच डारिस पराकृतिक ह बने हवय, अनप घर मा एक ठक बोरड ला बनवा के लगा दिस, पटवारी के परकिरित चिकित्सा सनसथान, इंहा बिना दवई,सूजी,गोली के फोकट मा जम्मो बीमारी के इलाज होथे, समाज सेवा बर निह्सुल्क संचालित, डॉ.पटवारी,आदेश गुरु महाराज के, अऊ पटवारी भईया के फोकट के दवा खाना चालू होगे, पहिले -पाहिल मरीज आइस हमर भकाडू बबा हा, देखिस ता डॉ.पटवारी हा खुस होगे,ये दे आज्जे दुकान ला चालू करे हवं अऊ मरीज आना घलोक चालू होगे,आ बबा बईठ कहिके बईठार लिस, पटवारी -'का होगे बबा?'भकाडू बबा- 'का बताओं गा एक हफ्ता ले बुखार धरे हवय बने गोली खायेवं फेर माडहिस नईये,एक दम तीपे हवय देखना' पटवारी कहिस - 'तोला तो अड़ बड बुखार धरे हवय बबा,ये दे हाथ ला छी के जानेव,अब इंहा आगेस सब बने होही, माड जाही कौनो संसो करे के गोठ नई ये.'

अईसे कहीके पटवारी ह बबा ला टेबल में सुता दीस,'देख बबा परकिरित चिकित्सा में तोला डरे के कोई बात नई ये, सरीर हा तीपे हवय तो ओला ठंडा करे के चाही, में बर्फ मंगावत हंव' कहिके परसोत्तम ला पठोईस. 'बने बर्फ के ठंडा पानी मा नहाबे ता तोर बुखार हा उतर जाही,ते बने हो जाबे बबा कहिके बने टेबल मा सुता लीस,पटवारी अऊ परसोत्तम दुनो झन मिलके बबा ला एकदमे ठंडा पानी मा नहवा दिस,पानी सरीर मा परिस तो बबा हा मार डरे रे कहिके जोरदार चिल्लईस, रद्दा बाट मा रेंगईया मन पटवारी के घर भीतरी आगे,का होगे कोन मरत हे कहिके,देखिस ता पटवारी अऊ ओखर नौकर परसोत्तम दुनो झन बबा ला धरे रहाय अऊ ठंडा पानी ला डारत रहाय, बबा हा छटपटात रहाय अऊ बचाओ -बचाओ कहिके गोहार पारत रहाय, ओ मन बबा ला हाथ लगा के देखिस ता ठंडा होगे रहाय,बेचारा मन बबा ला धर के हस्पीटल लेगीस त उंहा के डाक्टर मन हा इलाज चालू करिस त तीन दिन मा बबा हा होंउस आईस, ये दे बेरा मा पटवारी ला समझास दे के सियान मन हा छोड़ दिस, पटवारी हा बाँचगे.

कहिथे ना कुकुर के पूंछी हा टेडगा के टेडगा रहिथे नई सुधरय,तईसने गोठ पटवारी के हवय.एके हफ्ता होय रिहिस ये घटना ला,पटवारी हा फेर एक ठक नवा मरीज पा गे, पाछू के मोहल्ला मा देवार डेरा हवय, दारा सिंग देवार के टूरा ला बिच्छी चाब दिस, ओमन टूरा ला धर के ओखरे मेर लान दिस, टूरा के संगे -संग जम्मो देवार डेरा हा उमड़ गे, पटवारी देखिस मरीज आये हवय, पहिले तो सोचिस नई करवं इलाज ला,फेर सोचिस जेन हा अपन होके इलाज कराये बर आये हवय तेखर तो करना चाही, डाक्टरी के पेसा मा कोनो ला मना नई करना चाही अईसे कहिथे,सोच के पटवारी हा घर में टूरा ला बला डारिस. अऊ पुछिस" काय होगे गा? बिच्छी काट दिस साहेब -देवार किहिस, कोन मेर काटे हवय ? पटवारी पुछिस. एदे जेवनी गोड में काटे हवय- देवार किहिस. पटवारी पुछिस- ता कोनो हा माखुर धरे हव ?धरे हवं, कहिके एक झन देवार हैं पटवारी ला माखुर दिस. डॉ.पटवारी हा थोकिन माखुर ला घस के सान्फी मा रखिस अऊ ओमा पानी डार के, टूरा ला पुछिस- कोन गोड मा काटे हवय, टूरा हा किहिस जेवनी मा, ता डेरी आंखी ला खोल किहिस अऊ जईसने डेरी आंखी ला खोलिस ता माखुर के पानी ला टूरा के आंखी मा नीचो दिस,टूरा हा दाई ओ .........

कहिके आंखी ला धर के गोहार पारे लागिस' मोर आंखी ला फॉर डारिस कहिके, दू मिनट मा टूरा के आंखी फूल के लालियागे,देवार मन देखिस ये दे टूरा के आंखी फ़ुट गे, जम्मो झन डौकी लईका सुद्धा पटवारी ला छरे ला चालू कर दिस, जउन पावथे तउन भका भक चालू हवय, बेदम मार गा, में हा दुरिहा ले देखत रहेवं, ओ...........हो............बेदम मार ,गरुवा कस पीटत हे, महू हा जीव परान दे के घर डाहर भागेवं, काबर का भीड़ मा कभू -कभू देखईया हा घला परसाद पा डारथे, इही ला  कहिथे का? "आंजत-आंजत कानी होगे "

कईसे लागिस संगी हो हमर पटवारी भईया के गोठ-बुता हा,जरा बटन ला चपक के बतावव मयारू हो

आप मन के
गंवईहा संगवारी

ललित शर्मा
अभनपुरिहा

4 Comments:

नारायण प्रसाद said...

मेरी मातृभाषा मगही है । यद्यपि इस हास्य-कथा का अधिकांश मुझे समझ में आ गया, परन्तु निम्नलिखित शब्दों के अर्थ ठीक से समझ में नहीं आये -

ब्लॉग के शीर्षक में - अड़हा, गोठ

थोकिन, घलोक, सूजी, माडहिस, तीपे, मन, माखुर, सान्फी, डौकी, छरे, दुरिहा, डाहर, घला

और अन्त में -
गंवईहा, संगवारी

कोई ऑनलाइन छत्तीसगढ़ी का कोश हो तो बताएँ ।

ललित शर्मा said...

प्रसाद जी, मगही और 36 गढी मे ज्यादा फ़र्क नही है, आप ने बढिया शब्द ढुँढ कर निकाले हैं,
अड़हा=गाँव का अनपढ भोला आदमी
गोठ= बात, गोष्ठ-गोष्ठी-गोठ
थोकिन= थोड़ा सा
घलोक= साथ में या वो भी
सुजी= सुई= इन्जेक्शन या कपड़ा सीलने वाली
माड़हीस= रखा या रखा गया
तीपे= गरम था या है
मन= ये बहु वचन के लिए उपयोग मे आत है जैसे
मनखे= आदमी,मनुष्य, मनखे मन= बहुत सारे आदमी, आपमन= आदर सुचक बहुवचन सम्बोधन
माखुर= तम्बाखु
सांफ़ी= रुमाल, साफ़ करने का कपड़ा
डौकी= बीबी या औरत
छरे= मारा या मार
दुरिहा= दूर
डाहर= उस तरफ़-डहर-डगर इत्यादि
घला= वो भी,सम्मिलित
गवैइहा= गाँव का
संगवारी= मित्र,मितान,दोस्त,
अभी ऑनलाइन छत्तीसगढ़ी का कोश की जानकारी नही है होने पर आपको सूचित करुंगा
रुचि लेने के लिए धन्यवाद
मगही मै पुरी समझता हुँ तथा आपकी पोस्ट बराबर पढता हुँ, टिप्प्णी आज ही किया हुँ,स्वागत है आपका क्षेत्रिय भाषाओं का भी प्रचार प्रसार आवश्यक है।

Nirmla Kapila said...

ये समझ नहीं आया

नारायण प्रसाद said...

मगही और 36 गढी मे ज्यादा फ़र्क नही है, .....
मगही मै पुरी समझता हुँ तथा आपकी पोस्ट बराबर पढता हुँ...



यह जानकर तो बहुत खुशी हुई । धन्यवाद !


मन= ये बहु वचन के लिए उपयोग मे आत है जैसे
मनखे= आदमी,मनुष्य, मनखे मन= बहुत सारे आदमी, आपमन= आदर सुचक बहुवचन सम्बोधन



यह चीनी भाषा का बहुवचन सूचक प्रत्यय "मन" ( 们 ) (men) हिन्दी भाषा में कैसे घुस गया ? इस पर कुछ शोध की आवश्यकता है ।

चीनी भाषा में -
वो ( 我 ) = मैं
वोमन ( 我们 ) = हम, हमलोग

नी ( 你 ) = तुम
नीमन ( 你们 ) = तुमलोग

था ( 他 ) = वह (पु॰)
थामन ( 他 ) = वे, वे लोग (पु॰)

परन्तु मैन्ड्रिन चायनीज़ में "मन" (men) का उच्चारण "मँ" जैसा किया जाता है ।

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