बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

राजा नल बिपदा म परिस, भूंजे मछरी दहरा मा गिरिस


का कहिबे संगी फ़ेर कहेच बर परथे। गियानिक मन कहिथे के जिनगी मा ऊंच-नीच चलत रहिथे। अइसन कोनो परानी नई होही जौन कभु बिपदा म नई परे होही। अमीरी गरीबी अऊ सुख दुख जिनगी मा चलत रहिथे। फ़ेर सरकारी नाप जोख म गरीबी अऊ अमीरी जिनगी भर एकेच रहिथे। ऊंखर पैमाना ह नई बदलय। गरीब मनखे मन बर कईयो योजना चलत हे। जेखर फ़ायदा कोनो ल मिलत हे कोनो ल नई मिलत हे। सरकार ह गरीबी नापे पर डांड़ खीच डरे हे। तौने के हद म अवईया मन ल गरीबी रेखा म आगे कहिथे। तहां उंखर रासन कारड बनथे अउ सरकारी योजना के फ़ायदा ओला मिलथे।

अईसन नईए के मनखे हं जिनगी भर गरीब रहिथे या अमीर रहिथे। गरीबी-अमीरी के पैमाना ऊंखर कमई हे। जेखर मेरन खर्चा करे बर पईसा हे तौन अमीर अऊ जेखर मेरन जिनगी ल चलाए बर पइसा नईए तौन गरीब। गरीब ले अमीर बनना सुख देथे। पैसा ह बाढ़ते तहां चेहरा म अमीरी के रौनक आ जथे। फ़ेर अमीर ले गरीब होना बड़ घातक हो जथे। न जिए सकय न मरे सकय। ओ ह कतको कही दिही के गरीबी आ गे हे त कोनो माने ल तइयार नई होए। मनखे के जिनगी मा कभु अइसने टैम घलो आथे जब माटी ह सोन हो जथे त कभी सोन ह घलो माटी हो जथे।

सियान मन कहाय के पइसा ल त कुकुर नई खाए। फ़ेर मनखे ल जिनगी चलाए बर पईसा जरुरी हो जथे। सरकार के पैमाना ह मनखे के हद ला नापथे। एक बेर जेखर गरीबी रेखा म नाव लिखा त फ़ेर जिनगी भर बर लिखा गे। चाहे वो ह कमा के बिल्डिंग खड़े कर डरे, चाहे खेत खार बिसा डरे। एक झिन चीज बसत वाले मनखे घर गेंव त पक्की घर मा 2 रुपया किलो चांऊर वाला पीला बोरड लिखाए रहाय। एक झिन घर गेंव त ओ ह अपन बियारा म एक बत्ती कनेक्सन लगाए रहाय अऊ ओखर ले घर भर के लट्टू ल बारत रहाय। ट्रेक्टर अऊ फ़टफ़टी घलो घर मा माढे रहाय फ़ेर ओ ह गरीबी रेखा मा आए।

अऊ जौन सही मा गरीब हे तेखर मेरन गरीबी रेखा के परमान पतर नईए। का करही बपरा ह, जांगर तोर कमाही, अऊ खप जही। समय के मार ले राजा हरिश्चंद घलो नइ बांचिस। एक टैम अइसन आईस के बेटा के किरिया करम बर घलो मरघट्टी के खरचा नई रहिस। गरीब होगे बपरा ह। फ़ेर राजा के नाव त राजा हे। ओला कोन गरीब मानही। कहिथे न दंतला ह तरिया म बूड़त हे तौन ला देखईया मन हांसत हे कहात हे अऊ दंतला बेचारा बूड़ गे तहां जीव परान छूट गे।

एक ठिक गोठ ह सुरता आथे। गांव मा एक झिन मनखे फ़ांसी खा गे। काठी-माटी म जम्मो गांव वाला मन सकलाईस। कईस होगे? काबर कर डारिस अइसन अलहन बूता ल। थोड़ दिन पाछु गांव वाला मन आरो पाईन के ओखर मेरन पैइसा कौड़ी के जुगाड़ नई बैईठत रहिस। अऊ अपन सकऊल बूता खोजे त घलो नई मिलय। हलकानी मा जीवने ल सिरा डरिस। सगा अऊ हितवा-मितवा मन कहाए के हमला एको पईत घलो नई बताईस। एको बेर कही देतिस त काहीं कुछु जमाए दे रहितेन। बड़े भाग मानुस तन पावा।

अइसन दुनिया हे। कहिथे न राजा नल बिपदा म परिस, भूंजे मछरी दहरा मा गिरिस। टैम टैम के गोठ हे गौ, मनखे के इही समय परिक्छा के होथे। जब अतेक बड़ राजा के परिक्छा होगे त छोट-मोट मनखे के का मरजाद हे। सरकार ल गरीबी रेखा के घलो  पांच साला चुनई बरोबर चुनई कराना चाही। जौन सकऊल होगे तेखर नाव ल काटय अउ जौन ह ओखर गरीबी रेखा के खांचा म बैईठत हे तौन ल जोड़ना चाही। सरकार त सरकारे आए, जौन मन लागही तौन करही। मोर सलाह काए मानही। फ़ेर का कहिबे संगी, कहे बिगर रहे नई सकवं, केहेच ल लागथे। 

1 Comment:

avinash netam said...

Aap man thorech Thor ma katka bade gotth la bata de hawa kas sarkar h aap man ke ye soch la pura kare bar kono upay kartich.

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